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डायवर्सनटेक्स पर अवैधानिक कार्यवाही चेम्बर ऑफ कॉमर्स के आग्रह पर जानने आज सायँ 5 बजे पधारेगी नगरीय प्रशासन मंत्री श्रीमती माया सिंह जी चेम्बर भवन कृपया पधारे

डायवर्सन टेक्स पर प्रशासन की विसंगति पूर्ण कार्यवाही ओर अनावश्यक नोटिस के संदर्भ में एक ज्ञापन मप्र चेम्बर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधिमंडल ने संभागीय आयुक्त श्री बी एम शर्मा जी को दिया और विस्तार से चर्चा की संभागीय आयुक्त ने कुछ विसंगति की बात को स्वीकारते हुए शीघ्र उचित कार्यवाही का आश्वासन भी दिया इस पर शीघ्र जनप्रतिनिधियो से मुलाकात कर उनसे भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की जाएगी

डायवर्सन टेक्स की अवैध ओर जबरिया वसूली के विरोध में संभागीय आयुक्त को ज्ञापन आज 24 मार्च 2018 शनिवार सायँ 4 बजे मोतीमहल कार्यालय पर आप सभी से अनुरोध कृपया इस अवैधानिक वसूली पर अपना विरोध प्रकट करने के लिए आपसे अनुरोध कृपया 3.45 बजे तक मोतीमहल पर एकत्रित हो कृपया अवश्य पधारे निवेदक मप्र चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री ग्वालियर

हमारे विशेष अनुरोध पर पूर्व महाधिवक्तता ओर सांसद श्री विवेक तनखा जी चेम्बर कार्यालय पधारे ओर प्रशासन द्वारा अवैधानिक रूप से वसूल किये जाने वाले डायवर्सन टेक्स पर चर्चा भी की साथ ही चेम्बर को प्राप्त लगभग 7 करोड़ रुपये के डायवर्सन नोटिस गलत बताते हुए इस तरह की वसूली को अवैधानिक बताया साथ ही इस लड़ाई में चेम्बर का साथ निभाने का भी आश्वासन दिया इस अवसर पर प्रशांत शर्मा जी पारस जैन जी निर्मल जैन जी पवन अग्रवाल जी भी उपस्तिथ थे

म प्र चेम्बर ऑफ कॉमर्स में प्रशासन के तुगलकी फरमान डायवर्सन टेक्स नियम विरुध्द वसूले जाने पर एक बैठक हुई जिसमें 300 से अधिक व्यपारियो ओर उधोगपतियों ने भाग लिया और तय किया कि इसके लिए एक आंदोलन चरणबद्द तरीके से किया जाए इसके लिए एक संघर्ष समिति भी बनाई जाए इसके अंतर्गत 24 मार्च को संभागीय आयुक्त को एक ज्ञापन दिया जाए उसके बाद आगामी रणनीति तय की जाए

संपत्तिकर मेगा शिविर (सम्पूर्ण शहर 66 वार्डो का) समस्या निवारण एवम जमा कल दिनाक:- 20 मार्च मंगलवार समय:-सुबह 11 से 2 बजे तक स्थान:-मप्र चेम्बर भवन कृपया पधारे ओर शिविर को सफल बनाए निवेदक मप्र चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री

चैत्र नवरात्रि व हिन्दू नववर्ष २०७५ (विक्रमसंवत) हार्दिक शुभकामनाएं. यह नूतन वर्ष आप व आपके परिवार के जीवन मे,सुख , शांति, शक्ति, सम्पति, स्वरुप, संयम, सादगी, सफलता, समृध्दि, साधना, संस्कार, और स्वास्थ्य दे. यही प्रभु से कामना है ।

सम्पत्ति कर, समस्या निराकरण व जमा शिविर का आयोजन मंगलवार 20 मार्च को ‘चेम्बर भवन’ में महापौर, श्री विवेकनारायण शेजवलकर जी रहेंगे विशेष रूप से उपस्थि शहर के व्यवसाईयों, उद्योगपतियों सहित आमनागरिकों की सुविधा हेतु सम्पत्ति कर शिविर का आयोजन मंगलवार, दिनांक 20 मार्च,18 को सुबह 11.00 से 02.00 बजे तक ‘चेम्बर भवन’ में महापौर-माननीय श्री विवेकनारायण शेजवलकर जी की विशेष उपस्थिति में आयोजित किया जाएगा । इस शिविर में शहर के सभी 66 वॉर्डों में मौजूद सम्पत्तियों का, सम्पत्ति कर से संबंधित समस्याओं का नियमानुसार उचित निराकरण किया जाएगा और सम्पत्ति कर की राशि जमा भी की जाएगी । यदि किसी सम्पत्तिकरदाता की सम्पत्ति कर को लेकर यदि कोई आपत्ति है, तो वह अपनी आपत्ति का आवेदन दो प्रतियों में मय साक्ष्यों सहित शिविर में लाएँ, ताकि उनकी समस्या का उपिस्थित अधिकारियों द्वारा उचित समाधान किया जा सके ।

विवाह पार्क के लिए न्यूनतम भूखण्ड/भूमि क्षेत्र हेतु दस हजार वर्गमीटर का प्रावधान अव्यवहारिक : चेम्बर ऑफ कॉमर्स म.प्र. भूमि विकास नियम-2013 के नियम-53 में संशोधन किए जाने चेम्बर ने मुख्यमंत्री एवं नगरीय विकास एवं आवास मंत्री को लिखे पत्र म.प्र. भूमि विकास नियम-2012 के नियम 53 में विवाह पार्क (मैरिज गार्डन) हेतु 5 लाख से अधिक जनसंख्या वाले निवेश क्षेत्र में विवाह पार्क के लिए न्यूनतम भूखण्ड/भूमि क्षेत्र 10,000 वर्ग मीटर (अर्थात् 1,07,639वर्गफुट) का प्रावधान किया गया है| इस अव्यवहारिक प्रावधान में संशोधन किए जाने हेतु म.प्र. चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री द्बारा प्रदेश के मुख्यमंत्री-श्री शिवराज सिंह चौहान एवं नगरीय विकास एवं आवास मंत्री-श्रीमती मायासिंह को पत्र प्रेषित किये गये हैं म.प्र. भूमि विकास नियम-2012के नियम 53 में विवाह पार्क (मैरिज गार्डन) में यह प्रावधान किया गया है कि 5 लाख से अधिक जनसंख्या वाले निवेश क्षेत्र में विवाह पार्क के लिए न्यूनतम भूखण्ड/भूमि क्षेत्र 10,000 वर्गमीटर (यानि 1,07,639 वर्गफुट) होना चाहिए यह नियम पूर्णत: अव्यवहारिक है और इस नियम के तहत सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में मात्र 5-10 मैरिज गार्डन ही ऐसे होंगे, जो इस मानक को पूर्ण करते हों उक्त नियम का हवाला देते हुए नगर निगम ग्वालियर द्बारा शहर के विवाह स्थलों को नोटिस जारी किये गये हैं और इस मानक को पूर्ण करने के लिए बाध्य किया जा रहा है एवं अन्यथा मैरिज गार्डन को सील्ड करने की बात कही जा रही है यदि ऐसा किया जाता है तो शादियां पहले की तरह सड़कों पर होंगी और टेंट आदि की सारी व्यवस्थायें लोगों को मजबूर होकर सड़कों पर ही करना पड़ेगी, जिससे शादियों के सीजन में यातायात की भारी समस्या उत्पन्न होगी| चेम्बर ने पत्र में सुझाव दिया हैै कि - म.प्र. भूमि विकास नियम-2012 के नियम 53 में विवाह पार्क (मैरिज गार्डन) में आने वाले आगंतुकों के आधार पर विवाह पार्क के क्षेत्रफल का निर्धारण किया जाना चाहिए-उदाहरणार्थ:- क्रमांक विवाह में आने वाले लोगों की संख्या भूखण्ड/भूमि क्षेत्र १. 500 व्यक्ति आगन्तुक मेर्रिज गार्डन 2500 वर्गमीटर २.500-800 व्यक्ति आगन्तुक मेर्रिज गार्डन300 वर्गमीटर ३. 800-1200 व्यक्ति आगंतुक मेर्रिज गार्डन 4000 वर्गमीटर ४.1200-1500 व्यक्ति आगंतुक मेर्रिज गार्डन 4500 वर्गमीटर ५.1500 से अधिक व्यक्ति आगंतुक मेर्रिज गार्डन 5000 वर्गमीटर चेम्बर ने पत्र के माध्यम से मांग की है कि म.प्र. भूमि विकास नियम 2012 के नियम-53 में उपरोक्तानुसार संशोधन यथाशीघ्र किया जाए ताकि नगर निगम ग्वालियर द्बारा विवाह पार्कों/स्थलों को सील्ड किए जाने की कार्यवाही को रोका जा सके एवं इस अव्यवहारिक नियम से उत्पन्न होने वाली कठिनाईयों का निराकरण हो सके|

कलेक्टर एवं जिला मूल्यांकन समिति अध्यक्ष एवं जिला पंजीयक को कलेक्टर गाइड लाइन पर भेजे सुझाव नवीन छह वार्डों में कलेक्टर गाइड लाइन में वृद्घि न की जाए : चेम्बर ऑफ कॉमर्स वर्ष 2018-19 की प्रस्तावित कलेक्टर गाइड लाइन पर मध्यप्रदेश चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री द्बारा कलेक्टर एवं जिला मूल्यांकन समिति अध्यक्ष तथा जिला पंजीयक पर सुझाव प्रेषित किये गये हैं चेम्बर द्बारा कलेक्टर गाइडलाइन पर निम्नलिखित सकारात्मक सुझाव प्रेषित किये गये हैं:- * मुख्य मार्ग से 6 मीटर अंदर तक वाणिज्यिक दर से व उसके बाद रिहायशी दर से सम्पत्ति का मूल्यांकन किया जाए| यह व्यवस्था 3-4 साल पुरानी गाइडलाइन में की गई थी * प्रमुख बाजारों के गलियों में भी बड़ी संख्या में लोग रहते हैं व प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त करते हैं जबकि खरीदी के वक्त कॉमर्शियल दर से ही सम्पत्ति का मूल्यांकन किया जाता है जो कि प्रमुख बाजार के पास जुड़ी गलियों में मकान-जायदाद मुख्य मार्ग से लगी होने के बाद भी कम कीमत पर मिलती हैं जबकि स्टाम्प ड्यूटी मुख्य बाजार अनुसार ही देनी होती है| इसके लिए प्रमुख बाजारों के साथ मोहल्ला या गली की कीमत अलग निर्धारित की जानी चाहिए * ग्वालियर शहर के प्रमुख बाजारों में प्रथम मंजिल पर व्यवसायिक गतिविधि का प्रचलन न के बराबर है जब तक कि उसे कॉम्पलेक्स के रूप में न बदला जाये चेम्बर ने मांग की है कि जो वाणिज्यिक कॉम्पलेक्स हैं, तब तो उनका वाणिज्यिक दर से मूल्यांकन किया जाए लेकिन अगर मुख्य बाजारों में मकानों का क्रय-विक्रय होता है, तो ऐसी स्थिति में प्रथम मंजिल पर रिहायशी दर से ही सम्पत्ति का मूल्यांकन कर, स्टाम्प ड्यूटी ली जाये * चूंकि मुख्य बाजारों में वर्तमान में ग्वालियर शहर के अंदर प्रथम मंजिल व ऊपर के भागों में कॉमर्शियल कॉम्पलेक्सों को छोड़कर गैर घरेलू उपयोग न के बराबर है, जबकि प्रथम मंजिल या उसके ऊपर के भाग या पीछे की तरफ के भाग का क्रय-विक्रय किया जाता है तो उस पर वाणिज्यिक दर से मूल्यांकन किया जाता है, जबकि यह मूल्यांकन वास्तविक उपयोग के विपरीत है| अत: मुख्य बाजारों में प्रथम मंजिल और उसके ऊपर एवं पीछे के भाग का यदि उपयोग घरेलू है तो उसका मूल्यांकन घरेलू दर से ही किया जाना चाहिए इसके लिए इन क्षेत्रों में घरेलू दरें निर्धारित की जाना चाहिए * वर्तमान में घरेलू निर्माण दर दस हजार रूपये प्रति वर्गमीटर है जो कि प्रचलित दरों से थोड़ी सी ही अधिक है लेकिन इसके विपरीत व्यवसायिक उपयोग के निर्माण की दर पच्चीस हजार रूपये प्रति वर्गमीटर निर्धारित कर रखी है जबकि वास्तविकता में उसके निर्माण में घरेलू उपयोग से कम लागत आती है| इसलिए किसी भी स्थिति में वाणिज्यिक निर्माण की दर घरेलू निर्माण से अधिक नहीं होना चाहिए यहां यह उल्लेखनीय है कि इंदौर महानगर में वाणिज्यिक निर्माण की दर तेरह हजार रूपये प्रति वर्गमीटर है * मल्टी स्टोरी एवं कॉम्पलेक्सों में जहां प्रकोष्ठ के माध्यम से रजिस्ट्रियां होती हैं| वर्तमान में केवल ग्वालियर शहर में प्रत्येक मंजिल पर भूमि का मूल्य अलग-अलग लिया जाता है जिससे फ्लेट/दुकान का मूल्यांकन अधिक हो जाता है| वहीं एक ही भूमि को बार-बार मूल्यांकन की दृष्टि से उपयोग किया जाता है जो कि न तो वैधानिक दृष्टि से और न ही व्यवहारिक दृष्टि से उचित है हमारी मांग है कि इंदौर जैसे महानगर और गुजरात जैसे राज्य का मॉडल ग्वालियर में भी लागू किया जाये, जिसमें भूमि के एरिये को उस पर बने हुए फ्लेट या दुकान में अनुपातिक रूप से विभाजित किया जाता है वहीं केन्द्र सरकार द्बारा आयकर अधिनियम में पूंजीगत लाभ की गणना में यही तरीका इस्तेमाल किया जाता है * जो नवीन छह वार्ड नगर निगम सीमा में शामिल किये गये हैं, उनमें न तो कोई विकास कार्य हुए हैं और न ही कोई प्रगति है ऐसी स्थिति में इस आधार पर कि वह शहर की सीमाओं में शामिल हो गए हैं और कलेक्टर गाइडलाइन में वृद्घि कर दी गई है जिसकी वजह से वहां पर भूमि का क्रय-विक्रय नहीं हो पा रहा है| कारण स्पष्ट है कि यदि खरीददार व बेचने वाले स्टाम्प ड्यूटी का लेखा-जोखा अपने खातों में करता है तो पूंजीगत लाभ की गणना सर्किल गाइडलाइन से मूल्यांकन किया जाता है| नवीन छह वार्डों में शामिल क्षेत्रों की गाइडलाइन का सूक्ष्मता से अध्ययन कर, इन्हें संशोधित किया जाये क्योंकि इन क्षेत्रों की दरों में वृद्घि करते वक्त किसी भी प्रकार का विचार-विमर्श नहीं किया गया * जिन रजिस्ट्रियों में विक्रेता के साथ सहमतिकर्ता भी होते हैं और सहमतिकर्ता अपनी सहमति देने के एवज में कोई पैसा नहीं लेता है| ऐसी स्थिति में उस पर कोई अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी नहीं ली जाती है| वहीं यदि भवन/भूमि की कलेक्टर गाइडलाइन के कुल योग से ही सहमतिकर्ता को राशि दी जा रही है, शेष राशि विक्रेता को दी जा रही है तो ऐसी स्थिति में कोई अतिरिक्त शुल्क सहमतिकर्ता के ऊपर नहीं लगना चाहिए * विभाजन/संशोधन/प्रकोष्ठ/पूरक दस्तावेज में सभी प्रतियों में नक्शा अपलोड करने की व्यवस्था होना चाहिए वर्तमान सॉफ्टवेयर में इसकी व्यवस्था नहीं है चेम्बर ने मांग की है कि उक्त सुझावों को दृष्टिगत रखते हुए आगामी कलेक्टर गाइडलाइन में आवश्यक सुधार किये जाएं, जिससे कलेक्टर गाइडलाइन आदर्श गाइडलाइन बन सके

लक्ष्य पूर्ति हेतु नहीं होगी बिलिंग : श्री अक्षय खरे चेम्बर भवन में विद्युत समस्या समाधान शिविर आयोजित उपभोक्ताओं की शिकायतों का समाधान तत्परता के साथ किया जाएगा और लक्ष्य पूर्ति हेतु उपभोक्ताओं पर अनावश्यक बिलिंग नहीं की जाएगी| यह बात आज मध्यप्रदेश चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री में आयोजित मासिक विद्युत समस्या समाधान शिविर में म.प्र. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के महाप्रबंधक शहर वृत्त-श्री अक्षय खरे ने कही| शिविर में उपमहाप्रबंधक-उत्तर संभाग-श्री डी.के. तिवारी, उपमहाप्रबंधक-मध्य संभाग-श्री मनीष गौतम, उपमहाप्रबंधक-पूर्व संभाग-श्री अवधेश त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में व्यापारी एवं आमजन अपनी शिकायतों के साथ उपस्थित हुए| शिविर में विद्युत देयक में सुधार, मीटर रीडर द्बारा गलत रीडिंग लिए जाने, आंकलित खपत लगाए जाने, बिल ज्यादा आने, लोड कम किए जाने मीटर डिस्कनेक्ट करने के बाद भी बिल प्राप्त होने जैसी समस्याएं प्राप्त हुईं| शिविर का संचालन कर रहे मानसेवी सचिव-डॉ. प्रवीण अग्रवाल द्बारा समस्याओं को महाप्रबंधक, शहर वृत्त के समक्ष प्रस्तुत किया गया| महाप्रबंधक शहर वृत्त-श्री अक्षय खरे जी द्बारा जिन समस्याओं का समाधान तत्काल किया जा सकता था, उनका तत्काल व कुछ समस्याओं को अधीनस्थ अधिकारियों को अग्रेषित कर, शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए| शिविर में एक उपभोक्ता द्बारा चालू माह का बिल प्रस्तुत किया गया जो स्याही की कमी के चलते बहुत ही हलका था इस पर तुरंत महाप्रबंधक-श्री खरे द्बारा सर्विस प्रोवाइडर कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि को मोबाइल लगाकर फटकार लगाते हुए कहा कि उपभोक्ताओं को स्पष्ट रूप से अंकित बिल दिए जाएं| यदि भविष्य में फिर ऐसा बिल दिखाई दिया तो आपके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी| शिविर में उपभोक्ताओं को सम्बोधित करते हुए महाप्रबंधक-श्री अक्षय खरे ने कहा कि वितरण कंपनी द्बारा लक्ष्य पूर्ति हेतु बिलिंग नहीं की जाएगी| विद्युत उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान करना हमारा ध्येय है| हमारा प्रयास रहता है कि उपभोक्ता की समस्या का शीघ्रातिशीघ्र निराकरण हो

मासिक विधुत समस्या समाधान शिविर 11वर्ष बाद पुनःचेम्बर में प्रारम्भ प्रत्येक माह द्वितीय शुक्रवार को इस माह का शिविर 9 मार्च शुक्रवार आज 11से 1PM तक मौजूद रहेंगे विधुतमण्डल के सभी वरिष्ठ अधिकारी कृपया निर्धारित समय मे पधारे ओर लाभ उठाएं

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